खगोल में रुचि रखने वालों के लिए खास रहा आज का दिन। साल का सबसे बड़ा दिन (लगभग 14 घंटे) रहा आज। दुनिया के 154 देशों में हुआ पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग। मेरठ में प्रयोग के समय सूरज बादलों में छिपा रहा, और बाल वैज्ञानिक मिट्टी के लेप के साथ प्रयोग कर रहे थे।

पिछले दस दिन से सुशांत सिटी के सेक्टर-3 में स्थित इंडियन ग्लोबल पब्लिक स्कूल, मेरठ में प्रगति विज्ञान संस्था द्वारा चल रही विज्ञान कार्यशाला आज संपन्न हो गई। आज सूरज कर्क रेखा पर मध्याह्न के समय लंबवत रहा (यह रेखा 23°26′ पर स्थित है) और अधिकतम 13 घंटे 59 मिनट 43 सेकंड तक सूरज ने दिन का उजाला बनाए रखा।

सबसे पहले सभी ने मिट्टी का लेप अपने शरीर पर लगाया, फिर सारिका गोयल और रीता जी के निर्देशन में योग किया। इसके बाद दीपक शर्मा ने सभी को पृथ्वी की परिधि मापने का तरीका सिखाया। उन्होंने बताया कि सबसे छोटी परछाईं निकालकर हम कई प्रयोग एक साथ कर सकते हैं — जिधर सबसे छोटी परछाईं होती है, उधर ही हमारा रियल नॉर्थ होता है, और उसी की मदद से अक्षांश तथा पृथ्वी की परिधि भी माप लेते हैं।
आज सबसे छोटी परछाईं 12:20 बजे आई, जिसका कोण लगभग 5°68′ रहा, हालाँकि प्रयोग के दौरान सूरज के सामने बादल आ रहे थे। दीपक शर्मा ने बताया कि मिट्टी में सभी प्रकार के तत्व होते हैं जो चर्म रोगों को दूर करते हैं और शरीर के रोमछिद्र खोल देते हैं; इसका लेप करने से आप 5–6 घंटे तक धूप में बिना गर्मी लगे पूरी ऊर्जा के साथ काम कर सकते हैं।
